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मुफ़्त · हिंदू कैलेंडर

हिंदू कैलेंडर 2027

आपका 2027 हिंदू कैलेंडर: नीचे वर्ष के प्रमुख त्योहार, साथ ही हर अमावस्या, पूर्णिमा और एकादशी के त्वरित लिंक। सभी लाहिड़ी अयनांश से गणना।

त्योहारतिथि
मकर संक्रांतिशुक्रवार, 15 जनवरी 2027
वसंत पंचमीगुरुवार, 11 फ़रवरी 2027
महाशिवरात्रिशनिवार, 6 मार्च 2027
होलिका दहन (होली)सोमवार, 22 मार्च 2027
गुड़ी पड़वा / उगादीबुधवार, 7 अप्रैल 2027
राम नवमीबुधवार, 14 अप्रैल 2027
बैसाखीगुरुवार, 15 अप्रैल 2027
महावीर जयंतीरविवार, 18 अप्रैल 2027
हनुमान जयंतीमंगलवार, 20 अप्रैल 2027
अक्षय तृतीयाशनिवार, 8 मई 2027
बुद्ध पूर्णिमाबुधवार, 19 मई 2027
गुरु पूर्णिमारविवार, 18 जुलाई 2027
नाग पंचमीशुक्रवार, 6 अगस्त 2027
रक्षा बंधनसोमवार, 16 अगस्त 2027
कृष्ण जन्माष्टमीबुधवार, 25 अगस्त 2027
गणेश चतुर्थीशुक्रवार, 3 सितंबर 2027
नवरात्रि आरंभगुरुवार, 30 सितंबर 2027
दुर्गा पूजा (महाष्टमी)गुरुवार, 7 अक्टूबर 2027
दशहरा (विजयादशमी)शनिवार, 9 अक्टूबर 2027
करवा चौथसोमवार, 18 अक्टूबर 2027
धनतेरसबुधवार, 27 अक्टूबर 2027
दिवाली (लक्ष्मी पूजा)शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027
भाई दूजशनिवार, 30 अक्टूबर 2027
छठ पूजागुरुवार, 4 नवंबर 2027
कार्तिक पूर्णिमा / देव दिवालीशनिवार, 13 नवंबर 2027

हिंदू कैलेंडर क्या दर्शाता है

हिंदू कैलेंडर चंद्र-सौर है: मास चंद्रमा का अनुसरण करते हैं जबकि वर्ष कभी-कभी अतिरिक्त (अधिक) मास से सूर्य के साथ संरेखित रहता है। त्योहार चंद्र मास की तिथि व पक्ष से तय होते हैं, जबकि संक्रांति सूर्य से। यह पृष्ठ 2027 के त्योहार और मासिक तिथि दिनों को एक जगह लाता है। महत्वपूर्ण तिथियाँ अपने स्थानीय पंचांग से मिलाएं।

और जानें

पूरी हिंदू त्योहार 2027 सूची देखें, या अपनी मुफ़्त कुंडली और राहु काल देखें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हिंदू कैलेंडर को क्या कहते हैं?

पारंपरिक हिंदू कैलेंडर को पंचांग कहते हैं, जिसका अर्थ है 'पाँच अंग' — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। यह चंद्र-सौर है, चंद्र मास और सौर वर्ष संरेखण का संयोजन।

हिंदू वर्ष में कितने मास होते हैं?

बारह चंद्र मास — चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, पौष, माघ और फाल्गुन — और लगभग हर तीन वर्ष में एक अधिक मास जोड़ा जाता है।

क्या 2027 की तिथियाँ सटीक हैं?

तिथियाँ लाहिड़ी अयनांश से गणना की गई हैं और अधिकतर दिन तक सटीक हैं। कुछ अनुष्ठान सूर्योदय, सूर्यास्त या मध्यरात्रि के समय और क्षेत्रीय परंपरा पर निर्भर करते हैं, इसलिए महत्वपूर्ण तिथियाँ अपने स्थानीय पंचांग से मिलाएं।

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